भीनमाल में लक्षार्चन महायज्ञ:27 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा महोत्सव, तैयारियां तेज

एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया
सभा में युवाचार्य स्वामी अभयदास महाराज ने सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं एवं परोपकार सेवा प्रकल्पों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समाज को एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरुकुलम जैसी पहल से भारतीय संस्कृति को नई दिशा मिलेगी और समाज में नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण होगा।
दिनेश दवे ने बताया कि 36 कौम भारतीय समाज की उपस्थिति में श्रीमाल नगरी भीनमाल में महाराज श्री का शुभागमन ऐतिहासिक है और आगामी आयोजन भव्य स्वरूप में संपन्न होगा। कार्यक्रम से पूर्व मंत्रोच्चार के साथ कुमकुम पत्रिका का पूजन कर नगर के प्रमुख देवताओं को आमंत्रित किया गया।
इस दौरान स्वामी अभयदास महाराज का शॉल, अंगवस्त्र, श्रीफल, पुष्पमाला एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर नागरिक अभिनंदन किया गया। नगर प्रवेश पर वाद्य यंत्रों, दुंदुभियों और गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम व्यास ने किया।
ये रहे मौजूद
इस दौरान हकसिंह राव, श्याम खेतावत, कोलचंद सोनी, प्रेमाराम बंजारा, पहाड़सिंह राव, मोहनसिंह सिसोदिया, जगदीश रामावत, जयरूपाराम सुन्देशा, दिव्य स्वरूप महाराज, वेलाराम घांची, दिनेश दवे, नवीन, वचनसिंह, पं. प्यारेलाल व्यास, नरपतजी, मेसाराम देवासी, एडवोकेट शिवनारायण विश्नोई, बगदाराम, ओटसिंह राव, विजय सिंह राव, कान्तिलाल जैन, नेनाराम चौहान, पारसमल घांची, चंपालाल सोनी, जोरावर सिंह राव, मफतलाल सोनी, छोगाराम बंजारा, राजु सिंह परमार, जयना शर्मा, मंजु वैष्णव, कंचन देवी, सुरेश पारीक, मोहब्बतसिंह, वीराराम सुथार, जबराराम भाटी, किशोर सांखला, मोहनलाल परिहार, प्रेमराज पुरोहित, भाविका त्रिवेदी, मंजु बोहरा, पीयू त्रिवेदी, वीराराम राणा, गजाराम मेघवाल, नरेंद्र आचार्य, भाविन व्यास सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

श्री वराह श्याम मंदिर सत्संग भवन में आगामी 27 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित होने वाले लक्षार्चन महायज्ञ एवं सहस्त जनजाति गुरुकुलम उद्घाटन महोत्सव को लेकर नगर में व्यापक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं।
इस अवसर पर वराह स्वरूप भगवान वराह श्याम तथा महाकवि माघ की प्रतिमा के समक्ष पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद प्रतिनिधियों को पीले चावल के साथ आमंत्रण पत्र दिए गए। प्रमुख देव स्थानों एवं ट्रस्टों को भी कुमकुम पत्रिका सौंपकर आयोजन में सहभागिता का आग्रह किया गया।